पॉलिटिक्स इतना बुरा भी नहीं है
आज जब भी हमारे मन में पॉलिटिक्स या पॉलिटीशियन का शब्द आता है तो बस एक ही चीज याद आता है, करप्शन। इसे दूसरे तरीके से ऐसे भी कह सकते हैं कि हर पॉलिटीशियन और करप्शन एक ही सिक्के के दो पहलू दिखते हैं। समझ नहीं आता क्या सच में पॉलिटिक्स का मतलब करप्शन हो गया है।
मैं भी एक छात्रा हूं। अपने सारे दोस्तों को बढ़ते देखा है। खुद से भी काफी आकांक्षाएं रही हैं। मगर फिर भी जब खुद या दोस्तों के जीवन में एक दिशा की बात करें तो हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना चाहता है। कोई भी पॉलीटिशयन नहीं बनना चाहता। इसका कारण बस हमारे मन में एक ईमेज है कि पॉलिटिक्स का मतलब करप्शन और हम करप्ट नहीं होना चाहते। हमारी तो एक ही सोच है कि हमें कुछ भी करना है, ऐसा करना है जहां कि हमें कोई गलत नहीं साबित कर सके, और जहां जाए, वहां इज्जत की निगाह से ही हमें सब देंखें।
पर किसी को तो बदलाव करना होगा। आज एक हिंदी सिनेमा देख रही थी तो ख्याल आया की इसे कीचड़ कहकर छोड़ नहीं सकते, इसको साफ करने के लिए कदम तो उठाने ही होंगे। इस दिशा में जो हाल में छात्र संध चुनाव की घोषणा की गई है। मुझे लगता है यह एक मील का पत्थर साबित होगा। राजनीति की बुनियाद छात्र संघ ही है। लेकिन इसे साफ सुथरा रखने की जिम्मेवारी भी हमारी है। और इसमें युवाओं की भूमिका काफी महत्पूर्ण है। युवा ही इस कीचड़ को साफ कर सकते हैं?
साइमा अंजुम
आज जब भी हमारे मन में पॉलिटिक्स या पॉलिटीशियन का शब्द आता है तो बस एक ही चीज याद आता है, करप्शन। इसे दूसरे तरीके से ऐसे भी कह सकते हैं कि हर पॉलिटीशियन और करप्शन एक ही सिक्के के दो पहलू दिखते हैं। समझ नहीं आता क्या सच में पॉलिटिक्स का मतलब करप्शन हो गया है।
मैं भी एक छात्रा हूं। अपने सारे दोस्तों को बढ़ते देखा है। खुद से भी काफी आकांक्षाएं रही हैं। मगर फिर भी जब खुद या दोस्तों के जीवन में एक दिशा की बात करें तो हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना चाहता है। कोई भी पॉलीटिशयन नहीं बनना चाहता। इसका कारण बस हमारे मन में एक ईमेज है कि पॉलिटिक्स का मतलब करप्शन और हम करप्ट नहीं होना चाहते। हमारी तो एक ही सोच है कि हमें कुछ भी करना है, ऐसा करना है जहां कि हमें कोई गलत नहीं साबित कर सके, और जहां जाए, वहां इज्जत की निगाह से ही हमें सब देंखें।
पर किसी को तो बदलाव करना होगा। आज एक हिंदी सिनेमा देख रही थी तो ख्याल आया की इसे कीचड़ कहकर छोड़ नहीं सकते, इसको साफ करने के लिए कदम तो उठाने ही होंगे। इस दिशा में जो हाल में छात्र संध चुनाव की घोषणा की गई है। मुझे लगता है यह एक मील का पत्थर साबित होगा। राजनीति की बुनियाद छात्र संघ ही है। लेकिन इसे साफ सुथरा रखने की जिम्मेवारी भी हमारी है। और इसमें युवाओं की भूमिका काफी महत्पूर्ण है। युवा ही इस कीचड़ को साफ कर सकते हैं?
साइमा अंजुम